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भारत-चीन के राजनायिक संबंधों की 55वीं वर्षगाँठ

भारतीय युवा नेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल चीन के सात दिवसीय दौरे के बाद आज देश की राजधानी दिल्ली लौटा । यह दौरा भारत और चीन के बीच राजनायिक संबंधों की 55वीं वर्षगाँठ मानाने हेतु आपसी भाईचारे को और सदृढ़ करने के लिए आयोजित किया गया था । वर्ष 1949 में नए चीन की स्थापना के बाद के अगले वर्ष , भारत ने चीन के साथ राजनायिक संबंधों को स्थापित किया था । प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व युवा मामलों के मंत्रालय के सचिव श्री राजीव गुप्ता ने किया । युवा प्रतिनिधि मंडल में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक शिवम छाबड़ा, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्री सिद्देश नाईक, सुश्री शिवानी दानी, सुश्री नीति जैन, श्री नरेंदर भाटी, चंडीगढ़ भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष श्री अमित राणा, सांगली (महारष्ट्र) से युवा नगर सेवक सुश्री स्वर्धा केलकर, पंजाब भाजयुमो सचिव एवं पूर्व क्रिकेटर श्री पैरी गोयल, छात्र नेता श्री अंकित चौधरी, श्री विपिन डागर प्रमुख रूप से थे ।
     भाजयुमो के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक शिवम छाबड़ा ने कहा की भारत और चीन विश्व के दो बड़े विकासशील देश हैं  । दोनों ने विश्व की शान्ति और विकास के लिए अनेक काम किये हैं । लम्बे समय से चीन की सरकार भारत के साथ अपने संबंधों का विकास करने को बड़ा महत्व देती रही है । गौरतलब है की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के चीन का दौरा ऐतिहासिक रहा था । चीन के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में अंतरिक्ष, विज्ञान, दक्षता विकास, रेल, स्मार्ट सिटी, पर्यटन और सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और युवाओं की भूमिका के विषय में इस यात्रा पर चीन के युवा मामलों के मंत्रालय के बीच चर्चा की गयी । भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के युवा दूतों ने चीन में शान्ति एवं विकास का पोैगाम दिया ।
     चीन के बीजिंग में भारतीय दूतावास में आयोजित कार्यक्रम में भारत के दूत श्री अशोक कंठ ने भारतीय प्रतिनिधि मंडल को औपचारिक भोज दिया । इस कार्यक्रम के दौरान भारत और चीन के संबंधों और बेहतर बनाने के लिए चर्चा की गयी । प्रतिनिधि मंडल ने चीन सरकार के युवा मामलों के मंत्रालय, ऑल चीन युथ फेडरेशन के उपाध्यक्ष से भी मुलाकात की और दोनों देशों के युवाओं के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए युवा कार्यक्रमों के आयोजन के विषय में भी चर्चा की । उन्होंने आशा जताई के भारत-चीन के बीच अंतराष्ट्रीय सीमा को लेकर चल रहे विवाद को भी द्विपक्षीय बातचीत से जल्द सुलझा लिया जाएगा ।