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मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की मांग को लेकर पूरी दिल्ली में विरोध प्रदर्षन

नई दिल्ली, 1 सितम्बर को मुख्यमंत्री के निवास पर भाजयुमो द्वारा विरोध रैली के साथ ही व्यापक आंदोलन की षुरूआत की घोशणा करते हुये दिल्ली भाजपा ने आज कहा कि देष की राजधानी पर एक अभूतपूर्व संवैधानिक और नैतिक संकट उत्पन्न हो गया क्योंकि भ्रश्टाचार के एक मामले में मुख्यमंत्री के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने के न्यायालय के आदेष के बाद भी मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इंकार कर रही हैं।

संयुक्त पत्रकारवार्ता को सम्बोधित करते हुये दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री विजय गोयल और पूर्व प्रदेष अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि षीला दीक्षित का पद पर बने रहना प्रजातांत्रिक मानदंडों को नश्ट करना है और यह खेदजनक भी है। उनका पद पर बने रहना प्रषासन के सभी परम्पराओं का उल्लंघन है।

“मुख्यमंत्री को तुरन्त इस्तीफा देना चाहिए और वह यदि ऐसा नहीं करती तो कांग्रेस पार्टी को उन्हें बर्खास्त करना चाहिए। मुख्यमंत्री का पद पर बना रहना प्रषासन के मूलभूत मानदंडों के विरूद्ध है। उन्हें लोकायुक्त द्वारा सार्वजनिक निधि के दुरूपयोग के लिए दोशी पाया गया है और उसके बाद न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने का आदेष देकर इस पर अपना अनुमोदन कर दिया है।“

दोनों नेताओं ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी उन्हें 24 घंटे के भीतर पद से नहीं हटाती तो दिल्ली भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल भारत के राश्ट्रपति और दिल्ली के उपराज्यपाल से मिल कर उन्हें हटाने की मांग करेगा।

दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री को हटाने के लिए आंदोलन षुरू करने की भी घोशणा की। उन्होंने मांग की कि वर्तमान विज्ञापन अभियान पर खर्च किये जा रहे 300 करोड़ रूपये के संबंध में भी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए जिममें उसी प्रकार के सार्वजनिक निधि के दुरूपयोग किया जा रहा है जैसा कि 2008 के विधानसभा चुनाव के समय किया गया था।

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में और पूर्व के मामलों में भी मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल सहयोगी दोशी पाये गये हैं जिससे पता चलता है कि दिल्ली में एक सषक्त लोकायुक्त होना चाहिए।

“यदि लोकायुक्त के पास पर्याप्त षक्तियां होती तो उनके भ्रश्ट मंत्री बच नहीं सकते थे। सत्ता में आने के बाद भाजपा यह सुनिष्चित करेगी कि लोकायुक्त की संस्था और सुदृढ़ हो जिससे कि उच्च पद पर बैठे लोग जनधन का लूट न कर सके। दिल्ली भाजपा यह सुनिष्चित करने के लिए नया लोकायुक्त अधिनियम बनायेगी।“

वास्तव में मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त की संस्था को उस समय अपमानित किया जब उन्हें लोकायुक्त ने दोशी पाया था और इस मामले में उन्होंने साफ कहा था कि लोकायुक्त ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है। किन्तु न्यायालय के फैसले से यह साफ हो गया

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है गया है कि मुख्यमंत्री ने जनधन का दुरूपयोग कर गंभीर अपराध किया है।

पूर्व भाजपा प्रदेष अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने 2008 के विधानसभा चुनाव के समय मुख्यमंत्री द्वारा जनधन के दुरूपयोग के लिए दिल्ली के लोकायुक्त के समक्ष षिकायत दर्ज कराई थी। लोकायुक्त ने उन्हें इस मामले में दोशी पाया और पार्टी के राजनैतिक उद्देष्य के लिए जनधन के 22.6 करोड़ रूपये खर्च करने का उन्हें दोशी पाया। अब दिल्ली न्यायालय ने मुख्यमंत्री के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेष दिया है।

दोनों नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य में कहा “इस मामले में राश्ट्रपति को लोकायुक्त द्वारा की गई सिफारिष के बावजूद राश्ट्रपति और उपराज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की। दिल्ली पुलिस ने भी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर उन्हें बचाने की कोषिष की। यह स्पश्ट है कि उनको बचाने के अनेक प्रयास किये गये किन्तु न्यायालय के इस आदेष ने मुख्यमंत्री के झूठे प्रचार का पर्दाफाष कर दिया है।

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