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पंजाब प्रैस क्लब, जालंधर को डिप्टी सीएम से मिला लालीपॉप

प्लाट, बीमा लाभ और टोल टैक्स से छूट का किया था वादा : जालंधर : पंजाब में 2007 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (ब) का जोर था मगर फिर भी हर वर्ग को लुभाया जा रहा था। कमल का साथ तो था ही पर कलम को भी साथ करने के लिए शिअद (ब) ने चुनावी घोषणा पत्र में यह शामिल किया कि अकाली-भाजपा सरकार बनने पर पत्रकारों को विशेष कालोनी में प्लाट व बीमा लाभ दिया जाएगा जिससे पत्रकारों के मुंह में पानी भी आया और इसी क्रम में मीडिया सिटी ऑफ पंजाब के पत्रकार फटाफट पंजाब प्रैस क्लब के सदस्य बने।



अत: कांग्रेस को हर फ्रंट पर फेल करके अकाली-भाजपा ने पंजाब की सत्ता संभाली और पत्रकार अपने सपनों में अपनी कालोनी में अपने घर का सपना देखने लग गए। किसी ने यह सोचा कि वह कार्नर वाला प्लाट लेगा और किसी ने सोचा कि वह उत्तर दिशा वाला प्लाट लेगा मगर शिअद (ब) सत्ता में आते ही अपना वायदा ऐसे भूली जैसे मानो रात गई बात गई। हालांकि सत्ता के दूसरे वर्ष में एक नया वायदा जरूर किया कि जल्द ही पत्रकारों को टोल टैक्स से छूट प्रदान की जाएगी मगर वह 3 साल बीत जाने के बाद भी पूरा न हो सका।

पत्रकार यही ख्वाब देखते रह गए कि वह टोल प्लाजा पर अपना प्रैस का कार्ड दिखाकर मुफ्त में निकलेंगे और लोग उनको देखकर चर्चा करेंगे। हैरत की बात यह भी है कि शिअद (ब) के घोषणा पत्र को लेकर लगभग सभी समाचार पत्रों ने समाचार प्रकाशित किए लेकिन किसी ने भी अपने वर्ग से जुड़े मुद्दे पर दो लाइन तो दूर दो शब्द न लिखे। फिर क्या

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था, दिन, महीना और साल बीतते गए और उसके साथ-साथ शिअद (ब) की सत्ता के साढे चार साल भी बीत गए। उधर, दूसरी तरफ घोषणा पत्र

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में उक्त वायदों को शामिल करवाने का दावा करने वाला पंजाब प्रैस क्लब, जालंधर का प्रबंधन भी अपनी सत्ता के नशे में चूर रहा और अपने मुद्दों को लेकर एक बार भी प्रयास न किए लेकिन यह जरूर किया कि सीएम, डिप्टी सीएम व कुछ शिअद (ब) के मंत्रियों को क्लब में बुलाकर समय-समय सम्मानित जरूर करते रहे।

इससे ज्यादा कोई प्रयास न किए और करते भी क्यों क्योंकि प्रयास तो वहां किए जाते हैं जहां प्रयास न करने पर कुर्सी खिसकने का डर होता है और यहां पर तो कुर्सी की खसरा-गिरदावरी एक ही नाम पर चढ़ चुकी लगती है।  कारण 7-8 साल होने को हैं लेकिन प्रधान वही एक है और क्लब में चुनाव करवाए भी जाते हैं या नहीं, हुए तो कब हुए या फिर करवाए ही नहीं गए,  यहां तक कि किसी को क्लब के संविधान तक की जानकारी नहीं है।

अब मजे की बात यह है कि गत 4 नवंबर 2011 को अचानक पंजाब प्रैस क्लब, जालंधर के पदाधिकारियों को याद आया कि शिअद (ब) ने चुनाव में हमारे साथ कुछ वायदे किए थे और वह मौका पाकर डिप्टी सीएम के पास पहुंच गए। वहां क्या हुआ, आप अमर उजाला की 5 नवंबर 2011 को प्रकाशित खबर को पढ़कर चुटकी ले सकते है।

लालीपॉप मिलने की खबर जालंधर के मीडिया में जंगल की आग की तरह नहीं बल्कि परमाणु विस्फोट के असर की तरह फैली जिससे चूर हुए सपनों से हतप्रद क्लब सदस्यों ने परिवर्तन का फैसला कर लिया और सूचना अधिकार कानून 2005 के तहत पंजाब प्रैस क्लब, जालंधर से हिसाब मांगने वाले पत्रकार को समर्थन दे दिया है। अब सभी की निगाहें पंजाब राज्य सूचना आयोग के 28 नवंबर 2011 के फैसले पर टिकी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त जानकारियों, तथ्यों में कोई कमी-बेसी दिखे तो उसकी मरम्मत नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कर सकते हैं.


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